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Saturday, February 4, 2023
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मटर की खेती कैसे करें? यहां जानें

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मटर(pea) की छोले का स्वाद तो आपने ज़रूर चखा होगा। मटर (Pea) एक ऐसी सब्जी है जिसकी मांग सालों भर रहती है। इसके बेसन और दाल की भी खूब मांग रहती है। मटर में विटामिन ए, बी, सी और एंटीऑक्सीडेंट, मैग्नीशियम जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं। मटर में भरपूर मात्रा में फाइबर होता है। मटर की खेती (matar ki kheti) मिट्टी को भी उपजाऊ बनाती है। इसके जड़ों में पाई जाने वाली राइजोबियम जीवाणु मिट्टी को उर्वराशक्ति प्रदान करती है। मटर की खेती (matar ki kheti) से किसान कम लागत में अधिक मुनाफा कमा सकते हैं।

यदि आप भी पंरम्परागत खेती से हटकर मटर की खेती (matar ki kheti) करना चाहते हैं, तो यह आपके लिए फायदेमंद साबित हो सकता है। इसकी खेती कर आप सालभर धन कमा सकते हैं। क्योंकि मटर को बेचने के लिए किसानों को ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ती है। किसान इसे हरे और पक्के दोनों रुपों में बेच सकते हैं।

तो आइए,ताजा खबर online के इस ब्लॉग में मटर की खेती कैसे करें (matar ki kheti kaise kare), आसान भाषा में जानें।

इस ब्लॉग में आप जानेंगे

मटर की खेती के लिए उपयुक्त मिट्टी और जलवायु Pea Farming

खेत की तैयारी

मटर की बुआई का समय

बुआई की विधि

उर्वरक प्रबंधन

सिंचाई प्रबंधन

खतपतवार नियंत्रण

मटर की प्रमुख किस्में

रोग और कीट प्रबंधन

फसल की कटाई

मार्केटिंग कैसे करें

मटर की खेती में लागत, पैदावार और मुनाफा

मटर की खेती के लिए मिट्टी और उपयुक्त जलवायु


Pea Farming मटर की खेती के लिए दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त होती है। इसके अलावा भी गंगा के मैदानी भाग की मिट्टी में भी मटर की उपज अच्छी होती हैं। मटर की खेती के लिए मिट्टी का पीएच मान 6-7.5 सबसे अच्छा होता है। मटर की खेती अम्लीय मिट्टी में नहीं करें, इससे पैदावार में कमी आ सकती है।

मटर की खेती के लिए आर्द्र जलवायु उपयुक्त होती है। इस खेती में बीज अंकुरण के लिए लगभग 22 डिग्री सेल्सियस तापमान की जरूरत होती है, वहीं अच्छे विकास के लिए 10 से 18 डिग्री सेल्सियस तापमान बेहतर होता है।

खेत की तैयारी

Pea Farming मटर की अच्छी खेती के लिए खरीफ की फसल की कटाई के बाद खेत की जुताई मिट्टी पलटने वाले हल से करें इसके बाद पाटा लगाकर जमीन को बराबर कर लें। साथ ही उचित मात्रा में गोबर व कंपोस्ट खाद भी मिट्टी पलटने के समय डालें।

बुआई का समय

मटर की बुआई अक्टूबर-नवम्बर माह में की जाती है जो खरीफ की फसल की कटाई पर निर्भर करती है।

बुआई की विधि
पछेती बुआई में देशी हल में पोरा लगा हो या सीड ड्रिल से लगभग 30 सेंमीमीटर की दूरी पर बुआई करें। बीज की गहराई 5-7 सेंमीमीटर रखें।

उर्वरक प्रबंधन

Pea Farming मटर की बुआई से पहले नाइट्रोजन और फास्फोरस का छिड़काव करें। पोटेशियम की कमी वाले क्षेत्रों में पोटाश का इस्तेमाल करें और जिन क्षेत्रों में गंधक की कमी हो वहां बुआई के समय गंधक भी का छिड़काव करना आवश्यक है। अच्छी उपज के लिए कोई भी उर्वरक खेत में डालने से पहले मिट्टी की जांच करा लें और कमी होने पर उपयुक्त पोषक तत्वों को खेत में डालें।

सिंचाई प्रबंधन

मिट्टी में नमी आधार पर सिंचाई की आवश्यकता होती है। पहली सिंचाई फूल निकलने से पहले और दूसरी सिंचाई फलियां बनने के समय करनी चाहिए। इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि हल्की सिंचाई करें और खेत में पानी ठहराव न रहे।

खतपतवार नियंत्रण

Pea Farming खरपतवार फसल के निमित्त पोषक तत्वों व जल को ग्रहण का फसल को कमजोर करते हैं और उपज के भारी हानि पहुंचाते हैं। फसल को बढ़वार की शुरू की अवस्था में खरपतवारों से अधिक हानि होती है। अगर इस दौरान खरपतवार खेत से नहीं निकाले गये तो फसल की उत्पादकता बुरी तरह से प्रभावित होती है। यदि खेत में चौड़ी पत्ती वाले खरपतवार, जैसे-बथुआ, सेंजी, कृष्णनील, सतपती अधिक हों तो स्टाम्प-30 (पैंडीमिथेलिन) का छिड़काव करें। इससे काफी हद तक खरपतवारों को नियंत्रित किया जा सकता है।

मटर की प्रमुख किस्में

मटर की प्रमुख प्रजातियों को कद के आधार पर बांटा गया है। जैसे-

लम्बी किस्में

रचना

मालवीय मटर-२

बौनी किस्में

अपर्णा

के.पी.एम.आर. 400

के.पी.एम.आर. 522

पूसा प्रभात

पूसा पन्ना

रोग और कीट प्रबन्धन
रतुआ

Pea Farming इस रोग में पौधों पर हल्के से चमकदार पीले (हल्दी के रंग के ) फफोले नजर आते हैं। रोगी पौधे संकुचित व छोटे हो जाते हैं। अगेती फसल बोने से इस रोग का असर कम होता है। इसकी अवरोधी प्रजाति मालवीय मटर 15 मानी जाती है। इसके निदान के लिए गंधक का छिड़काव करें।

आर्द्रजड़ गलन

यह एक मृदा(मिट्टी) जनित रोग है। इस रोग में पौधों की निचली पत्तियां हल्के पीले रंग की हो जाती है। पत्तियाँ नीचे की ओर मुड़कर सुखी और पीली पड़ जाती है। इसके बचाव के लिए कार्बेन्ड़ाजिम और थीरम का छिड़काव करें।

चांदनी रोग

इस रोग में पौधों पर बादामी रंग के गोल निशान पाए जाते हैं। इस रोग से बचाव के लिए थीरम का छिड़काव करें।

तुलासिता/रोमिल फफूंद

इसमें पत्तियों की ऊपरी सतह पर पीले और नीचे रुई जैसी फफूंद छा जाती है और रोगग्रस्त पौधों की बढ़वार रुक जाती है। पत्तियां समय से पहले ही झड़ जाती है। इस रोग से छुटकारा पाने के लिए मौन्कोजेब और जिनेब का छिड़काव करें।

पौध विगलन

इस रोग में तना बादामी रंग का होकर सिकुड़ जाता है और पौधे मर जाते हैं। इसमें थीरम और कार्बेन्डाजिम का छिड़काव करें।

मटर की खेती में लगने वाले कीट और उसका प्रबंधन
तना मक्खी कीट

इसमें पौधे के पत्तियों, डंठलों और कोमल तनों में गांठें बनाकर मक्खी उनमें अंडे देती है। तनों में सुरंग बनाकर अंदर-अंदर खाती है,जिससे नए पौधे कमजोर होकर झुक जाते हैं और पत्तियों पीली पड़ जाती है। पौधों की बढ़वार रुक जाती है।

मांहू (एफिड) कीट

माहूं केवल रस ही नहीं चूसते, बल्कि जहरीले तत्व भी छोड़ देते हैं। इसके प्रकोप से फलियाँ मुरझा जाती हैं।

मटर का अधफंदा (सेमीलूपर)

यह मटर का साधारण कीट है। यह कीट पत्तियां खाते है लेकिन कभी-कभी फूल और कोमल फलियों को भी खा जाती हैं। जहां पर तना मक्खी या पटसुरंगा या मांहू का प्रकोप हो, वहां फोरेट का छिड़काव करें।

कटीला फली भेदक (एटीपेला)

Pea Farming यह कीट फलियों में छेद करता है। अगेती किस्म के अपेक्षा पछेती प्रजातियों पर इसका अधिक प्रकोप होता है।

फसल की कटाई
मटर की फलियां लगभग 130-150 दिनों में पकती है। इसकी कटाई दरांती से करनी चाहिए। इसके बाद दानों को 3-4 दिन धूप में सुखाकर उनको भंडारण पात्रों में रखें।

ऐसे करें मटर की मार्केटिंग


Pea Farming आप चाहे तो मटर की सब्जी के सीजन में इससे अपने गांव या आसपास के मंडियों में भेज सकते हैं। इसके अलावा आप मटर को सूखा कर भी बेच सकते हैं। आप चाहे तो अपने मटर को पैकेट में पैक करके और रेफ्रिजरेटर में रखकर सफल मटर (Green Pea) की तरह अन्य नाम से बाजारों में बेच सकते हैं।

मटर की खेती में लागत, पैदावार और मुनाफा


मटर की खेती (matar ki kheti) में मात्रा बीज और कीटनाशक की लागत आती है। मटर के अच्छे पैदावार के साथ इससे मुनाफा साल भर कमाया जा सकता है । आजकल तो बाजार में सालभर मटर को संरक्षित कर बेचा जाता है। वहीं इसको सूखाकर मटर दाल के रूप में भी इसका प्रयोग किया जाता है। जिससे सालाना लगभग 2-3 लाख का मुनाफा कमाया जा सकता है।

Pea Farming ये तो थी, मटर की खेती कैसे करें (matar ki kheti kaise kare), की बात। यदि आप इसी तरह कृषि, मशीनीकरण, सरकारी योजना, बिजनेस आइडिया और ग्रामीण विकास की जानकारी चाहते हैं तो इस वेबसाइट की अन्य लेख जरूर पढ़ें और दूसरों को भी पढ़ने के लिए शेयर करें

Resource :https://bit.ly/3I72f1n

Team Taja
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