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Saturday, February 4, 2023
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मधुमक्खी पालन कैसे करें, यहां जानें | Madhumakhi Palan

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madhumakhi palan: आज के दौर में कम लगने वाली मधुमक्खी की पालन कुटीर उद्योग के रूप में विकसित हो रहा है। यह एक ऐसा कृषि व्यवसाय है जिसमें कम लागत में अधिक मुनाफा प्राप्त होता है। मधुमक्खी पालन बेरोजगार युवाओं के लिए रोजगार का बेहतर साधन बन सकता है। इस व्यवसाय में अपार संभावनाएं होती हैं।

अधिकांश किसानों और युवाओं के सामने यही प्रश्न रहता है कि मधुमक्खी पालन किस तरिके से करें (madhumakhi palan kaise kare)?

तो आइए ताजा खबर online के इस लेख में मधुमक्खी की पालन (madhumakhi palan in hindi) को विस्तार से जानें।

मधुमक्खी में पालन पर एक नजर

madhumakhi palan: गौरतलब है कि हमारे देश में मधुमक्खी पालन प्राचीन काल से हो रहा है। इतिहास में शहद के उपयोग का कई जगह जिक्र होती है। प्राचीन काल मधुमक्खी पालन जंगल के पेड़-पौधों तक ही सिमित रहता है । लेकिन आज के समय में इसकी व्यावसायिक खेती बड़े पैमाने से होती है। शहद के उत्पादन के मामले में भारत का विश्व में पांचवा स्थान होता है।

शहद के लिए इन मधुमक्खियों का उपयोग होता है

◼️ रानी मधुमक्खी

ये सब मधुमक्खी अंडे देने का प्रयोग करती है और बाकी सभी मधुमक्खियां इसके अंडों की रक्षा की प्रयोग करते हैं।

◼️ श्रमिक मधुमक्खियां

यह मधुमक्खियां छत्ते भारी छत्ते में मौजूद होती हैं। इसमें मक्खी के पेट पर कई तरह की समानांतर धारियां भी पाई जाती हैं। इसको डंक मारने वाली मधुमक्खी भी कहते है। इन मधुमक्खियों में सबसे ज्यादा शहद एकत्रित करने की क्षमता होती है।

◼️ नर मधुमक्खी

madhumakhi palan: नर मधुमक्खियों का काम रानी मधुमक्खियों को गर्भाधान करना होता है। नर मधुमक्खी छत्तों में जमा शहद को खाकर आकार में नर मधुमक्खी श्रमिक मधुमक्खी से कुछ बड़ा और रानी मधुमक्खी से छोटा भी होता है।

ऐसे बनता है मोम

madhumakhi palan मधुमक्खी से मिलने वाले शहद के बाद मोम को भी मूल्यवान माना जाता है। मोम से ही मधुमक्खी अपना छत्ता भी बनाती है। इसलिए मधुमक्खी पहले शहद को खाती है और फिर उससे गर्मी पैदा होने पर अपनी ग्रंथियों के द्वारा छोटे-छोटे मोम के कुछ अंश बाहर निकाल देती है। इस प्रकार छत्तों में मोम बनता है।

madhumakhi palan: मधुमक्खी पालन (madhumakhi palan) में इन बातों का ध्यान रखें ।

जिस जगह पर आप मधुमक्खी पालन कर रहे हैं, वहां आस पास की जमीन को हमेशा साफ-सुथरी रखें।

मधुमक्खी कीड़े चींटे, मोमभक्षी कीड़े, छिपकली, चूहे, गिरगिट तथा भालू आदि यह सब इनके दुश्मन भी होते है। इसलिए इससे बचाव के पूरे इंतजाम भी करें।

मधुमक्खी में पालन के लिए उपयुक्त वातावरण

madhumakhi palan मधुमक्खी के लिए सबसे अहम उपयुक्त वातावरण होता है। मधुमक्खियों को किसी बाग या जहां अधिक पेड़-पौधे हो वहां पालें। मधुमक्खी पालन फूलों की खेती के साथ और भी अधिक फायदे मंद साबित होती है। मधुमक्खियां फसलों में परागण में काफी मदद करती हैं। जिससे 20 से 80 फीसदी तक फसल की उत्पादन में बढ़ोत्तरी की जा सकती है। सूरजमुखी, गाजर, मिर्च, सोयाबीन, पॉपी लेनटिल्स ग्रैम, फलदार पेड़ में जैसे नींबू, कीनू, आंवला, पपीता, अमरूद, आम, संतरा, मौसमी, अंगूर, यूकेलिप्टस और गुलमोहर जैसे पेड़ वाले क्षेत्रों में मधुमक्खी की पालन आसानी से किया जा जाता है।

मधुमक्खी में पालन के लिए उपयुक्त समय

जनवरी से लेकर मार्च तक मधुमक्खी की पालन (bee farming) करने का सबसे उत्तम समय होता है। लेकिन नवंबर से लेकर फरवरी तक समय इस व्यवसाय के लिए किसी वरदान से कम नहीं होत्ती है। इस दौरान अधिक लाभ भी मिलता है।

मधुमक्खी में लागत और कमाई

सरकार के द्वारा राष्ट्रीयकृत बैंकों से लोन की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है। चूंकि यह व्यवसाय एक लघु उद्योग श्रेणी के अंतर्गत आता है। लोन या सब्सिडी के लिए आप उद्यान विभाग और जिले के कृषि विज्ञान केंद्र से संपर्क करें।

शहद में खाने के फायदे

शहद को लोग कई तरिके से अपने लाभ के लिए इस्तेमाल करते हैं।

शहद शरीर को ऊर्जा प्रदान करता है।

शहद से धमनियों और खून साफ भी करने में काफी मदद मिलती है।

गले के संक्रमण के लिए शहद भी किसी वरदान से कम नहीं है।

शहद के एक चम्मच के साथ मक्खन में खाने से व्यक्ति को बुखार नहीं होता है।

बच्चों को प्रतिदिन एक चम्मच शहद खिलाने से उनकी याददाश्त से बढ़ती हैं

साथ ही खांसी, जुकाम, पाचन क्रिया, नेत्र विकार और सौंदर्य प्रसाधनों में इसका इस्तेमाल भी किया जाता है।

शहद शरीर की थकानको भी दूर करने में मदद करता है।

नींबू पानी के साथ शहद को मिलाकर सेवन करने से मोटापा भी कम होता है।

मधुमक्खी पालन के लिए भी योग्यता

आज के समय में मधुमक्खी पालन के लिए किसी भी विशेष योग्यता की जरूरत नहीं होती है। कम पढ़ा-लिखा व्यक्ति भी इस व्यवसाय के लिए प्रशिक्षण लेकर अपना व्यवसाय भी शुरू कर सकता है।

प्रशिक्षण की फीस भी ज्यादा नहीं होती है। केवल 400-500 रूपए में किसी संस्थान से प्रशिक्षण ले सकते हैं। कृषि विज्ञान केंद्र या कृषि को विभाग से आपको फ्री में प्रशिक्षण मिल जाएगी। इन प्रशिक्षण शिविरों में आपको शहद में उत्पन्न करने के लिए उचित वातावरण, नए-नए उपकरण एवं प्रबंधन की सही जानकारी और नई तकनीक, अधिक शहद देने वाली मधुमक्खियों की प्रजाति, नस्ल सुधार व रोगों से बचने की जानकारी और वैज्ञानिक विधि के बारे में सही तौर प्रशिक्षण दिया जाता है। इन सभी में ज्ञान से आप अपने व्यवसाय को और भी बढ़ा सकते हैं।

एक्सपर्ट की राय

ये तो मधुमक्खी पालन में (madhumakhi palan in hindi) The Rural India पर आपको कृषि एवं मशीनीकरण, सरकारी योजना और ग्रामीणमें विकास जैसे मुद्दों पर भी कई महत्वपूर्ण ब्लॉग्स भी मिलने पर जिनको पढ़कर अपना ज्ञान में बढ़ा सकते हैं और दूसरों को भी हम इस लेख को शेयर भी कर सकते हैं।

Resource : https://bit.ly/3ivEeqa

Team Taja
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