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Saturday, February 4, 2023
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जरबेरा फूल की खेती

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जरबेरा का फूल लोकप्रिय फूलों में से एक है। यह फूल दिखने में बहुत सुंदर और आकर्षक होता है। बाजार में जरबेरा के फूल की काफी मांग है। जरबेरा का फूलों का मूल्य भी बाजार में अन्य फूलों से अधिक मिलता है। 

जरबेरा (Gerbera) का फूल उत्साह का प्रतीक भी माना जाता है। इसके रंग-बिरंगे पंखुडियां तनाव को कम करने में काफी मदद करती हैं। इससे सकारात्मक ऊर्जा मिलती है। इसके फूल का उपयोग शादी समारोह की सजावट, गुलदस्ते बनाने, ऑफिस, रेस्टोरेंट और होटल में सजावट के लिए करते हैं। यही नहीं, इस फूल का उपयोग आयुर्वेदिक दवाइयां बनाने के लिए भी किया जाता है।

आज के समय में जरबेरा के फूलों की बाजार में अच्छी मांग होने के कारण जरबेरा की खेती (Gerbera ki kheti) किसान भाइयों के लिए आय का एक अच्छा स्रोत बन गया है। जरबेरा की खेती से किसान कम लागत में अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं।

तो आइए, ताजा खबर ऑनलाइन के इस लेख में जानें- जरबेरा की खेती की खेती कैसे करें? (gerbera ki kheti kaise karen)

इस लेख में आप जानेंगे

जरबेरा के फूल पर एक नजर

जरबेरा के लिए खेती की तैयारी

  • सबसे पहले अपने खेत से पुरानी फसल के बचें हुए अवशेषों और खरपतवारों को नष्ट कर दें। 
  • उसके बाद खेत में पलाऊ लगाकर जुताई करना शुरू करें। जुताई करने के बाद खेत को कुछ दिनों के लिए ऐसे ही छोड़ दें। जिससे खेत में बचें हुए हानिकारक कीट नष्ट हो जाएं।
  • इसके बाद खेत में गोबर खाद या वर्मी कंपोस्ट खाद को डालकर अच्छे से मिलाएं। खाद का अच्छे से मिलने के बाद खेत की दो से तीन बार तिरछी जुताई करें।  
  • इसके बाद खेत में तीन से चार दिनों के लिए पानी भर के छोड़ दें। उसके बाद खेत में उचित मात्रा में रासायनिक खाद का छिड़काव करके फिर दोबारा जुताई करें। जिससे मिट्टी अच्छे से भुरभुरी हो जाएं। 
  • उसके बाद खेत में पाटा चलाकर मिट्टी को समतल बनाएं। इसके बाद खेत में मेड़ बनाएं। मेड़ों की बीच की दूरी कम से कम दो फीट की होनी चाहिए।

जरबेरा फूल को अफ्रीका का मूल का फूल माना जाता है। इसे अफ्रीकी डेजी के रूप में भी जाना जाता है। जरबेरा के फूल की खासियत है कि इसे आप इसे पानी की बोतल में दो हफ्तों तक हरा भरा रख सकते हैं।

जरबेरा का फूल एक बारहमासी पौधा है। इस फूल में पीले, नारंगी, सफेद, गुलाबी, लाल और कई अन्य रंग मौजूद होते है, जो इसकी सुंदरता को बढ़ाते है। इसके डंडे काफी लंबे और हरे रंग के होते हैं।  

जरबेरा की खेती (Gerbera ki kheti) के लिए जरूरी जलवायु

जरबेरा एक समशीतोष्ण जलवायु का पौधा है। इसके लिए ठंड में धूप और गर्मी में हल्की छाया की जरूरत होती है। अधिक सर्दी की धूप में इसका उत्पादन बहुत कम होता है। इसके लिए अधिकतम दिन का तापमान 20 से 25 सेंटीग्रेड और रात का तापमान 12 से 15 डिग्री सेंटीग्रेड अच्छा होता है।  इस तापमान में जरबेरा फूल के पौधों का विकास सही से होता है। इसकी खेती को सिर्फ पॉलीहाउस में ही सफलतापूर्वक किया जा सकती है।

महाराष्ट्र, कर्नाटक, गुजरात, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और हिमाचल प्रदेश राज्य में जरबेरा फूलों का उत्पादन सबसे अधिक होता है।

जरबेरा की खेती के लिए उपयुक्त मिट्टी Gerbera Farming In

जरबेरा की खेती हर तरह की मिट्टी में की जा सकती हैं। लेकिन रेतीली मिट्टी को इसकी खेती के लिए बढ़िया माना गया है। जिस खेत की मिट्टी अच्छे से भुरभुरी होती है, उसमें इनका विकास अच्छे से होता है। अगर आपके पास इस तरह की मिट्टी नहीं है तो आप चिकनी मिट्टी में जीवांश पदार्थ अधिक मात्रा में अच्छे से मिलाएं। ताकि मिट्टी जरबेरा फूल की खेती करने के बन सके।

ध्यान रहें, इसकी खेती के लिए मिट्टी का पीएचमान 5.0 से 7.2 के बीच हो। इस तरह की मिट्टी को जरबेरा की खेती के लिए उत्तम माना जाता है और इसमें फूल का अधिक वृद्धि और अच्छा विकास होता है।

जरबेरा के पौधों की किस्में

जरबेरा के पौधों की लगभग 70 अलग अलग किस्में है। लेकिन व्यापारिक खेती के लिए किसान जरबेरा की कुछ ही किस्मों का अधिक उत्पादन करते हैं। इन किस्मों को उगाना बेहद आसान होता है।

ये किस्में हैं-

डस्टी (लाल), फ्लेमिन्गो (पीला), फ्रेडेजी (गुलाबी), फ्रेडकिंग (पीला), फ्लोरिडा (लाल), मारोन क्लेमेन्टीन (नारंगी), नाडजा (पीला), टैराक्वीन (गुलाबी), यूरेनस (पीला), वेलेन्टाइन (गुलाबी), वेस्टा (लाल) आदि प्रमुख है।

जरबेरा के लिए खेती की तैयारी

  • सबसे पहले अपने खेत से पुरानी फसल के बचें हुए अवशेषों और खरपतवारों को नष्ट कर दें। 
  • उसके बाद खेत में पलाऊ लगाकर जुताई करना शुरू करें। जुताई करने के बाद खेत को कुछ दिनों के लिए ऐसे ही छोड़ दें। जिससे खेत में बचें हुए हानिकारक कीट नष्ट हो जाएं।
  • इसके बाद खेत में गोबर खाद या वर्मी कंपोस्ट खाद को डालकर अच्छे से मिलाएं। खाद का अच्छे से मिलने के बाद खेत की दो से तीन बार तिरछी जुताई करें।  
  • इसके बाद खेत में तीन से चार दिनों के लिए पानी भर के छोड़ दें। उसके बाद खेत में उचित मात्रा में रासायनिक खाद का छिड़काव करके फिर दोबारा जुताई करें। जिससे मिट्टी अच्छे से भुरभुरी हो जाएं। 
  • उसके बाद खेत में पाटा चलाकर मिट्टी को समतल बनाएं। इसके बाद खेत में मेड़ बनाएं। मेड़ों की बीच की दूरी कम से कम दो फीट की होनी चाहिए।

आपको बता दें कि जरबेरा की खेती के लिए अच्छे बीजों का होना बेहद जरूरी है। इसकी खेती बीज और पौधा रोपण(नर्सरी) दोनों से कर सकते हैं।

खाद एवं उर्वरक प्रबंधन

जरबेरा के खेती के लिए पहले 3 महीने हर दो दिन बाद एनपीके (NPK) खाद को हर एक पौधे पर 1.5 ग्राम प्रति लीटर डालना चाहिए। पौधारोपण से पहले 10 किलो गोबर खाद प्रति वर्ग मीटर और फिर तीन महीने के बाद एनपीके 10 ग्राम, 15 ग्राम और 20 ग्राम प्रति वर्ग मीटर खेत में डालना चाहिए। जब पौधों पर फूल आना शुरू हो जाए, जब उन पर 1.5 लीटर कैल्शियम, बोरॉन, मैग्नेशियम और कॉपर जैसे सूक्ष्म पोषक तत्वों के मिश्रण का छिड़काव हिसाब से करना चाहिए। जिससे फूलों का सही से विकास हो सके।

सिंचाई प्रबंधन

जरबेरा की खेती के लिए आपको प्रतिदिन खेत में सिंचाई करनी चाहिए। क्योंकि इसके पौधों को हर रोज 700 से 1000 मिलीलीटर पानी की जरूरत पड़ती है। शुष्क मौसम में रोजाना खेती की हल्की सिंचाई करें। विशेषज्ञ के अनुसार जरबेरा खेती की सिंचाई के लिए पानी का पीएच मान 6.5 से 7.0 और ईसी(EC) 0.5 से 1.2 तक सही होता है।

रोग और कीट प्रबंधन

जरबेरा की खेती को बहुत ही ध्यान से रखरखाव करना होता है। इसमें कई तरह के हानिकारक रोग और कीट लग सकते हैं। इससे आपके कमाई में कमी आ सकती है। इसलिए किसानों के समय-समय पर जरबेरा के पौधों को निरीक्षण करते रहना चाहिए, जिससे आपको इनमें होने वाले रोगों के बारे में तुरंत पता चल जाए।

ध्यान रहें कि जरबेरा की खेती में किसी भी तरह की कीटनाशक दवा का छिड़काव करने से पहले वैज्ञानिकों की सलाह जरूर लें।

जरबेरा के पौधों में होने वाले प्रमुख रोग

रूट रॉट, फ्यूजेरियम, पाउडरी मिल्ड्यू, विषाणु रोग, सफ़ेद मक्खी, माहू आदि।

खेत में ऐसे कीट भी आते है,जिससे फूलों को नुकसान हो सकता है। 

व्हाईट फ्लाई कीट- यह कीट फसल का सारा रस चूस लेता है।

थ्रिप्स कीट-  यह कीट भी फसल पर लगे फसलों का सारा रस चूस लेता है।

एफिड्स कीट-  एफिड्स कीट फसल की नई पत्तियों और कलियों पर अपना दुष्प्रभाव प्रभाव डालता है। जिससे फसल का उत्पादन कम मात्रा में होता है।

लीफ माइनर कीट-  यह कीट फसलों के लिए बेहद खतरनाक है। इसके प्रयोग से फसल बहुत जल्दी मर जाती है। लीफ माइनर कीट काला और पीले रंग का होता है।

जरबेरा के फूलों की कटाई

खेत में रोपाई करने के लगभग 5 से 6 महीने में पौधों पर फूल आना शुरू हो जाते है। शुरुआत में इस फूल की कटाई दो से तीन दिनों के अंतराल पर करनी चाहिए। जब एक बार फूल पौधों पर अच्छे से खिल जाए तो आप रोजाना कटाई कर सकते है। फूलों की कटाई करने के तुरंत बाद उन्हें पानी से भरी बाल्टी में डालें। ताकि फूल मुरझाएं नहीं और यह रंग बिरंगे रहे।

जरबेरा की खेती में लागत और कमाई

Gerbera Farming In जरबेरा की खेती में जुताई से लेकर कटाई तक प्रति हेक्टेयर लगभग 2-3 लाख रुपए तक की कुल लागत आती है। वहीं अगर हम कमाई की बात करें तो बाजार में इस फूल की सुंदरता के कारण अधिक मांग होने से अच्छी कमाई होती है। जरबेरा की खेती से आप लगभग 7 से 8 लाख रुपए आराम से कमा सकते है।  

ये तो थी, जरबेरा की खेती की खेती कैसे करें? (gerbera ki kheti kaise karen) की जानकारी। यदि आप इसी तरह कृषि, मशीनीकरण, सरकारी योजना, बिजनेस आइडिया और ग्रामीण विकास की जानकारी चाहते हैं तो अन्य लेख जरूर पढ़ें और दूसरों को

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Team Taja
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